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कार्य करना सब काम नहीं
आह भरना ही नर्म नहीं
झूठ बोलना सब पाप नहीं
सच कहना ही धर्म नहीं
सत्य और विश्वास से,मंजिल कोई दूर नहीं

राह भटकना विषमार्ग नहीं
सहानुभूति सभी धैर्य नहीं
पत्ते टूटना ही मृत्यु नहीं
क्षमा करना सब न्याय नहीं
सत्य और विश्वास से मंजिल कोई दूर नहीं

मृत्यु ही सब डंड नहीं
पासा ही सब खेल नहीं
इंसानियत के नाम पर 
भाषण ही भाषा नहीं
सत्य और विश्वास से मंजिल कोई दूर नहीं 

त्यागना ही अर्पण नहीं
विश्वास सबकुछ नम्र नहीं
व्यूह रचना करके भी तुम,
मार डालना सत्य कर्म नहीं
सत्य और विश्वास से मंजिल कोई दूर नहीं

इच्छा जताना सब लोभ नहीं
संतोष करना भी मोह नहीं
पूर्ण पूष्प की तलाश में
पूष्प सब कोमल नहीं
सत्य और विश्वास से मंजिल कोई दूर नहीं 

सत्य को हमेशा समझा करो 
विश्वास लगन पर किया करो 
कितना भी गम तुम्हें रुलाये तो
सोने के वक्त तुम हँसा करो
सत्य और विश्वास से मंजिल कोई दूर नहीं


        लेखक:-विकास कुमार लाभ
                       मधुबनी(बिहार)