काफी देर बाद ,झाडियो के ओट  से निकल कर वो दोनो सडक पर आ गये,अब तक प्रणव ने उसका हाथ पकड रखा धा"""
धीरे धीरे सडक पर इक्का दुक्का लोग दिखने लगे थे ,और उन दोनो को ही टकटकी लगाये ,देखते जा रहे"""
वो लडकी समझ गई ,और धीरे से अपना हाथ , प्रणव के हाथ से छुडाने की चेष्टा करने लगी"""
प्रणव ने उसका हाथ और भी मजबूती से थाम लिया ।
और उसकी आँखो मे शरारत नाच गई """"":
वो लडकी धीरे से मुकुराई,उसकी धवल दन्तपक्ति चमक उठी,,,,,,,,,,,,
उसके गोरे रंग पर शर्म से तँबाई छा गई उसने गुलाबी रंग की   पटियाला कुर्ती पहन रखी थी "जो उस पर बहुत फब रही थी !!!!
प्रणव हाथ छोडो ,आने जाने वाले लोग हमे ही देख रहे है""""
देखने दो """""प्रणव ने ढीटता दिखाई,"""""छोडने के लिऐ नही पकडा है,प्रणव गभींरता से बोला,"""""
अच्छा बाबा ,अब छोड दो,""""लडकी ने मनुहार की,
अच्छा चलो ,,,तुम  भी क्या याद करोगी की हम जैसे अशिक मिले है"""""""""
वो लडकी खिलखिलाकर बोली """"",सही बात  है जनाब,
हम मान गये,अब तो छोडो """"""
कुछ ही समय मे दोनो ने एक दूसरे को बाय बोला ",और अलग होकर  अपने घर की ओर बढ गये"""""

नीरु बेटा तैयारी हो गई, जी बाबा,नीरु एक बडा सा बेग खिचती हुई ,बाहर की ओर बढ ग ई,,,
बाहर लगेजँ वाला टेम्पो खडा था,सारा घरेलु सामान भरा जा चुका था।"""""
घर से निकलते समय चन्द्रेश ने पलटकर घर की ओर देखा ""कितनी यादें भावनाऐ जुडी हुई है इस घर से""""""
वैसे तो ये घर दमयंती के पापा का था"जो उन्हौने बेटा न होने की वजह से दमयंती को उपहार स्वरुप दिया था।
पापा हम दादू के घर कितने घन्टो मे पहुँचेगे ,छोटे  ने पूछा,
यही कोई डेढ घन्टे मे,,,,,
अमलतास के फूलो के पास पहुँचते ही   अचानक टेम्पो ,रुक गया"""अचानक से नीरु की नजर पेड की ओट मे खडे ,जोडे पर पडी,वो चौक गई,,,,,
उसने आँखे मसली "पर ये क्या ""कृमशः आगे जारी"भाग-9



                               रीमा ठाकुर (लेखिका)
प्रिये पाठको वन्दन🙏🏼आप ये गुजरिश हे,की ये भाग भी आप लोग पढे ,और समीक्षा मे बताये की आपको ,कैसा लगा आभार🙏🏼🙏🏼💐💐💐💐