न जाने तुम कौन हो,क्यों ख़्वाबों में आते हो,
न तो नाम बताते हो,न अपना पता बताते हो,

कहते हो तुम्हे ले जाऊंगा दूर गगन की छाँव में,
हाथ में कंगन पहनाऊंगा और पायल तेरे पांव में

जो भी हो तुम जाओ अभी,मुझे नही कहीं जाना है,
धूमधाम से पहले अपने भैया का ब्याह रचाना है,

भाभी अभी नही आई है,पहले उन्हें घर लाना है,
माँ के संग रही,कुछ दिन भाभी संग बिताना है,

फिर तुम आना और ले जाना,दूर गगन की छाँव में,
हाथ में कंगन पहना देना और पायल मेरे पांव में।
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                   –प्रीति ताम्रकार
                      जबलपुर