"नारी अब बदलने लगी है,
ना सिर्फ पहनावों से,
बल्कि अपने विचारों से भी।
नारी अब आगे बढ़ रही है,
ना की अपनों को पीछे करके,
बल्कि सब को साथ लेकर ,
नारी अब तरक्की कर रही है,
ना सिर्फ रसोई के कामों में
बल्कि ऑफिस के कामों में भी।
नारी अब बातें रखने लगी है।
ना सिर्फ अपने संघर्षों के बारे में,
बल्कि औरों के हक के लिए भी।
नारी अब आवाज उठाने लगी है,
ना सिर्फ़ अत्याचारों के खिलाफ।
बल्कि समाज के लिए भी।
नारी अब अधिकार जताने लगी है,
ना सिर्फ सम्मान पाने के लिए,
दायित्व उठाने के लिए भी।
नारी समानता का अधिकार देने लगी है
ना सिर्फ लड़कियों को कराटे सिखाने में
बल्कि लड़कों को रसोई सिखाने में भी।
नारी अब मुस्कुराने लगी है,
ना सिर्फ दिखावे के लिए ,
बल्कि सम्मान पाने पर भी।
हाँ नारी अब जीने लगी है
ना सिर्फ अपनों के लिए,
बल्कि अपने लिए भी।।"
अम्बिका झा ✍️

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