माँ ओ माँ मै तेरी परछाई हुँ न
तेरे मन मन्दिर मे मै ही छाई हुँ न
पहली बार गोद मे लेकर मुझे
मन ही मन खूब मुस्कुराई हो न माँ
गोदी का पालना, लोरी गाकर
बाँहो का नरम बिस्तर पर सुलाई हो न माँ
तेरे मेरे नैन नख्श एक दूजे के दर्पण
मै बिलकुल तेरे जैसे दिखाई देती हुँ न माँ
उँगली पकड़कर गिरते पड़ते माँ
जीवन की पहली चाल तुमने सिखाई न माँ
हर मुश्किल हर परेशानी मे
सदा तुझे अपने साथ खड़ा पाई माँ
तेरी जादूई झप्पी पाकर
अपना हर दुख दर्द को भुलाई हुँ मे माँ
हर मुश्किल हर परेशानी को पार करना
तू ही तो मेरे राहत की गहराई है मेरी माँ
तेरा फूलों की तरह डाँटना ,ममता लुटाना
रूठना, मनाना, खिलाना ,मेरे नखरे उठाना
हाथों मे मेरे तेरा मेहंदी लगाना
बहुत याद आई मुझे तेरी मेरी माँ
जब तूने मेरी कर दी विदाई माँ
माँ ओ माँ मै तो तेरी परछाई हुँ न
दुनिया ने ये अजीब रीत क्यों बनाई
क्यों किस्मत मे लिखा माँ -बेटी की जुदाई
शिल्पा मोदी✍️✍️

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