बैठे बैठे एक ख्याल आया
पति पर बेहद प्यार आया
पूँछा ,,क्या बनाये आज आपकी
पंसद का भोजन ..बताओ जरा
चौक कर देखा,सूरज पश्चिम निकला
या फिर दाल मे कुछ है काला
रोज अपनी पंसद का खिलाती हो
आज मेरी पंसद का क्यो बनाती हो
सोचकर कहा,,दाल बाटी चूरमा
मैने कहा ,,कुछ और बताओ
तो छोले भटूरे गुलाब जामुन बना लो
नही नही ,,हैवी भोजन नही ।
कुछ और बताओ बह बनायेगे
फिर कहा,,मटर पनीर ,नाँन बना लो
मैने कहा ,,मैदा है नुकसान करेगी
तो आलू मटर और रोटी ही बना लो
सोचते सोचते बहुत देर हो गयी
फिर कहा ,,ऐसा करते है अब
हमारी पंसद ही चलने देते है
छुटटी है आपकी तो होटल चलते है ।
जब मन की करना था तुम्हे अपनी
तो पूँछा क्यो हमसे आकर अभी
बह तो मालूम है हमे मेरी महारानी
तुम सुनती सबकी ,करती मनमानी ।
मीनाक्षी शर्मा

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