नज़र उठाते ही तुमको अपने करीब पाना।
कितने तूफ़ान दिल में उठते हैं, कभी नहीं जाना।
कभी खबर ही नहीं मुझको हो पाई इसकी।
राह तकती रही उनकी और उनका नहीं आना।
सभी वादों को तोड़ पल में चल दिए क्यूं कर?
किए अपने ही वादों से उनका मुकर जाना।
बिखर जाना मेरी खुशियों की अमानत सारी।
मुझे मायूसियों में छोड़ कर उनका जाना।
मेरी मायूसियों का आज सबब मत पूछो।
किसी की याद में हद से कहीं गुज़र जाना।
बहार अब कहां आती है फूल कब खिलते?
बहार आने से पहले खिज़ा का आ जाना।
ग़म ए जुदाई में हुए हम मुब्तला इतने।
चमन के गुल कहीं खिलते ही बस बिखर जाना।
तुम्हारी याद के पलक पे है मोती ठहरे।
तेरे एहसास में ही ख़ुद ही ख़ुद संवर जाना।
चले आना कभी ख्वाबों में गर फुर्सत मिले।
नहीं रोकूंगी तुझको आके फिर चले जाना।
*** मणि बेन द्विवेदी
वाराणसी उत्तर प्रदेश

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