एक अरसे से उसने देखा भी नहीं मरी तरफ ।
क्या मैं अब उसको भूल जाऊ ,,,,वो भी तो भूल गया मुझे ,फिर मै ही मै क्यू याद करू ।
अरी चुन चुन चिड़िया क्या बड़बड़ा रही है अकेले में,
बुढ़िया में हुई हूं  और सठिया तू गई है ।
तो क्या करे अम्मा ,उसको बरसो हो गए हमें हाथ से छुआ भी नहीं ,,उस बिरहन सी जिंदगी हो गई है जिसको उसके प्रियतम ने भुला दिया हो।
कितने प्यार से लाया था जिद करके,, बोलने वाली चिड़िया चाहिए और उसकी माता ने एक एक रुपया  बचा के हमको ख़रीदा था 
तब याद है ना अम्मा तुम भी तो जवान थी आंखे मटकाने वाली गुड़िया बोलता था ना तुमको ।
ओर अपने ही हाथों सजाता था सब कहते ये तो लड़कियों का खिलौना है तो अपने से चिपका लेता और 
लड़ जाता कि नहीं ये तो हमारी है इसके जैसी ही दुल्हन होगी मेरी।
आंखे मटकाती गोरी गोरी।
हा री ,मगर तब वो बच्चा था दुनिया दारी कहा समझता था।
अब वो आधुनिक हो गया है थोड़ा बड़ा हो गया है अब वो हमसे नहीं खेलता ,पता नहीं वो कोनसा खिलौना है। जिसे हम हर वक्त अपने हाथों में रखता है उसके लिए तो खाना पीना भी भूल जाता है ।
फोन कहते हैं उसको अम्मा ,, मै सुनी थी ,उसकी अम्मा यही बोलती है ।
पर अम्मा ,वो तो भूल गया हम कैसे उसकी यादों को मिटा दे ।
सुना है वो कल किसी से लड़ाई कर के आया था एक हाथ टूट गया है उसी फोन के चक्कर की में ,
वो पास वाले पांडे जी है उसकी बेटी की तस्वीरे ले रहा था बिना पूछे ,
अब उसके बाबा ने सुत दिया अच्छे से,,,तुम ही बताओ अम्मा।
क्या ये अच्छा खिलौना हुआ। हमने तो कभी नहीं पिटवाया लल्ला को।
एक बार मेरे पास आ जाए तो उसको स्नेह से पुचकार तो दे।
अरे चुनचुन वो अब नहीं आएगा तू ये मान लें और अपने बेचैन मन को एकाग्र कर इस मोह माया से दूर हो जा।
तब ही भला करेंगे राम,,,,,,चल अब उदासी छोड़ ओर मुस्कुरा दे।


               रेणू सिंह