हिंदी संस्कृति की पहचान,
हिंदी है जगत की सुमधुर वाणी,
इसमे है संस्कृति का पुट
मिला ,
सही वर्तनी शब्द भंडार से
अलंकृत,
संस्कारों से सुसज्जित पहचान बनाती,
भारतीय संस्कृति का ध्वज लहराती,
हिंदी में साहित्य अमर हो गया ,
जीवन को एक समीचीन लक्ष्य दे गया,
हिंदी ,हिन्द,और संस्कारों का आँचल है,
गंगा सी पवित्र स्वर लहरी का सागर है,
सदा उच्च आदर्श थे हिंदी के विश्व मे,
दमकता रहे सदा धरती माँ का आँचल।
जय हिंदी भाषा, जय भारतीय संस्कृति,,,,
जय हो ,जय हो ,जय हो
डॉ. सुरभि जैन "श्रुति"
सतना म.प्र.

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