कमी पड़ रही है उनकी खातिरदारी में,
थोड़ा अपना इरादा बदल लीजिएगां...।
कदम उनके पडने वाले है जमीन पर कुछ वक्त के लिए आकाश को जमीं पर उतार दीजिएगां...।।

रंगत उनके हुस्न की बिखरी है फिज़ाओं में,
हवाओं को खूशबू में उनकी मदहोश ना होने दीजिएगां...।
कभी इठलाती तो कभी लाज का पर्दा लिए है,
अँखियों को आप अपनी तमीज़ समझा दीजिएगां...।।

नकाब उनका चेहरे से हटाने वाला है,
बादलों से कह देना, चाँद को अपने आँचल में छुपा लीजिएगां...।।
कयामत का समां आने वाला है,
तहज़ीब अपनी निगाहों को पढ़ा दीजिएगां...।

है मोम से भी नाजुक समन हमारा,
मौसम को पल- पल बदलने ना दीजिएगां...।
पहली दफ़ा उनकी तारीफ में कुछ लिखने जा रहा हूँ,
कलम को अल़्फाजो की खूबसूरत वर्णमाला सीखा दीजिएगां...।।

मौहब्बत की राह पर पहली बार चलने वाले है,
दर्दों की कोई दवा उनके लिए पहले से ही बनाकर रख दीजिएगां...।
आदत नहीं है उनको रातों में जागने की
रात को भी दिन में तब्दील कर दीजिएगां...।।
           
      आरती सुधाकर सिरसाट
      बुरहानपुर मध्यप्रदेश