हर रोज़ सोचती हूं, अब गुज़र जाएगा,
उस दौर से ,जो कभी गुजरता ही नहीं
हर रोज़ ,लगता है अब संवर जाएगा
मगर टूटा है जो, कभी बिखरता ही नहीं
कभी तो इसे ,किनारा मिल ही जाएगा
मगर ये अश्क है ,आंख से बहता ही नहीं
सोचती हूं ,जिंदगी का त्यौहार आएगा
मगर ये सांसों का सफ़र, गुजरता ही नहीं
कोई कल ,शायद सुकून की सुबह लाएगा
मगर ये आज है जो कभी गुजरता ही नहीं.....
ऋतु बाजपेई

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