बूढ़ी आंखें किसी के आने के इंतजार में
टकदरवाजे को ताकती,
दो पल बच्चों के साथ बैठ बिताने की चाह ,
अपने दिल में पालती कुछ नहीं मांगती
वह आंखें ममता प्यार अपनापन को तरसे,
पास तुम उन उनकी जाकर बैठो,
दुनिया भर की बातें कर ले।
बैठो दिन में कुछ क्षण उनके पास
जीवन जीवंत उनका हो जाए
कुछ है नहीं कुछ क्षण ही सही
बैठ उनके पास मन भरा भरा सा हो जाए
मात-पिता है वह तुम्हारे
अनुभव का खजाना उनके पास
वह बूढ़ी आंखें कुछ क्षण
किसी का साथ चाहती
ममता भरा स्पर्श चाहती
दो घड़ी कोई उनकी बात सुन ले
बस थोड़ा सा वक्त चाहती।।
दिल की कलम से
मधु अरोड़ा

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