⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘ ॐ ⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘
आखिर क्यों बढ़ती जाती है,
थम जाती है ख्वाहिशें---
चुपके से कानों में---
एक आहट सी आती है,
हर शाम आती है---
चुपके से कह जाती है---
अब इस उम्र में---
थोड़ा सुकून चाहती है,
उम्र की दहलीज---
आखिर क्यों बढ़ जाती है,
हर शाम आती है---
चुपके से कह जाती है,
संगीता वर्मा✍✍

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