************************


एक समय की बात है,एक परिवार में चार लोग रहते थे । माता-पिता और दो बच्चे । एक दिन परिवार के सभी सदस्य एक दिन के लिए कहीं बाहर जा रहे थे,घुमने के लिए । लेकिन परिवार के बड़े लड़के बाहर जाने से मना कर रहा था । क्योंकि उसको खेलने-धूपने में बहुत ज्यादा मन लगता था,और पढ़ाई में थोरा भी
मन नहीं लगता था । ओर तो ओर वो हमेशा खाने-पीने के लिए बहाना बनाता रहता था । उस दिन वो बहाना बनाकर साथ जाने से मना कर दिया । अब तो वह लड़का बिल्कुल अकेला हो गया । उसमें एक कमी था कि वह लड़का खाने-पीने वाले सामान का आदर नहीं करता था । जो भी भोजन करता तो थोड़ा खाता और बाँकी फेंक दिया करता था ।एक दिन वह सोच रहा था कि आज खाने के लिए क्या? बनाऊँ उसके मन में एक विचार आया कि माँ-पापा तो है नहीं क्यों न अपने दोस्त के घर चला जाए । वह लड़का अपने दोस्त के घर चला गया । काफी देर तक दोस्त के साथ खेलने के बाद वह दोनों काफी थक चुका था । खेलने के बाद वह लड़का अपने दोस्त से कहता है कि अरे यार मेरे घर पर कोई भी नहीं है,सभी कल आऐंगे । तो दोस्त ने कहा कोई बात नहीं आज तुम मेरे ही यहाँ रह जाओ कल चले जाना । उस दिन दोस्त की माँ भोजन में आलू का पराठा बनायीं । वह लड़का फिर वहीं किया,थोड़ा भोजन खाया और बाँकी जुठा छोड़ दिया । दोस्त की माँ ने उसे प्यार से एक बात  कहीं की तुम आज भोजन को ऐसे ही छोड़ दे रहे हो देखना कभी इसी भोजन के लिए तुमको भुखा रहना परेगा । रात बीत गई । सुबह दोनों दोस्त फिर से खेलने के लिए साथ में निकल गया । खेलते-खेलते शाम हो गया था । वह लड़का अपने दोस्त को "बाय-बाय दोस्त" कहकर अपने घर लौट आया । तो देखा कि न पापा आये हैं और न माँ आयीं है । फिर वह बहुत दुखी हुआ । लेकिन वह क्या करता । आज रात वह सोच रहा था कि कल तो दोस्त के वहाँ भोजन कर लिये ।  लेकिन आज मैं क्या करूँ? ऐसा मन में ख्याल आ रहा था । लेकिन उसे दोस्त की माँ की आलू के पराठे के बारे में सोचा । कि कैसे-कैसे आलू की पराठा बना रहीं थीं । ये उस लड़का के मन में ख्याल आ रहा था । फिर वो भी आँटा गूँथना शुरु किया। जैसे ही आँटे में पानी डाला,तो पानी ज्यादा हो गया । फिर भी वह लड़का गिला आँटा में और आँटा डाल कर किसी तरह आँटा गूँथ लिया । और फिर आलू उबाल कर पराठे तैयार कर रहा था । लेकिन वह पराठा बेल नहीं पा रहा था । उसे बहुत जोर से भूख लगा था । लेकिन फिर भी किसी प्रकार से टेढ़ा-मेढ़ा पराठा बेल रहा था । जब वह पराठा सेक रहा था,तो वह बार-बार जल जाता था । किसी प्रकार वह लड़का उस जले हुए पराठा को खा रहा था । तभी उसके मन में उसके दोस्त की माँ की कहीं बात याद आयीं । कि आज मेरे साथ इसलिए ऐसा हो रहा है कि मैं कभी भोजन का आदर नहीं किया । इसलिए आज भोजन मेरा आदर नहीं करता है । उस दिन के बाद वह लड़का कभी भी भोजन का अनादर नहीं किया । फिर वह बहुत खुश होकर जो भी भोजन उसे मिलता,बड़े प्यार से खा लिया करता था ।




      लेखक:- विकास कुमार लाभ                                 
                     मधुबनी( बिहार )