कुण्डलिया



।।1।।
हिन्दी भाषा  हिन्द  की , सबको  है अभिमान ।
यही   राष्ट्र  भाषा  बने , ऐसा   हो  अभियान ।।
ऐसा  हो  अभियान , सतत  निज उन्नत  माथा ।
जग  में  फैले  मान , हिन्द  की  गौरव  गाथा ।।
भारत  मंजुल  भाल , सुशोभित   जैसे  बिन्दी ।
भाषा  अनुपम जान , सरस है  बोली   हिन्दी ।।
।।2।।
भाषा  हिन्दी  मान है , निज संस्कृति  पहचान ।
संस्कृत  तनुजा  है  यही , मिलते  हैं  सम्मान ।।
मिलते   हैं   सम्मान , हिन्द  की  ना  है  सानी ।
मधुरिम   सुंदर   बोल ,  सर्वदा   हिंदुस्तानी   ।।
प्रगति  करे  विज्ञान,सन्त कवि जन अभिलाषा।
ग्रन्थ  गुणों  के  खान ,रचें  सब  हिन्दी  भाषा ।।



          प्रवीण कुमार ठाकुर
पतोरा,छुरिया, राजनांदगांव,छत्तीसगढ़