जिंदगी हम तेरे हर अंदाज में ढलते हैं।
हर रोज कुछ से कुछ होकर गुजरते हैं।
तेरे करम हैं,हमें आम से खास करते हैं।
तेरी हर हद से, हम सफ़र कर सीखते हैं
अब देखने वाले भी लाज़वाब कहते हैं।
तेरे दर्द भी कुछ यूं सज़ा कर रखते हैं।
तेरी हर धुन पर ही तो हम थिरकते हैं।
तुझे मंजूर हो उसी मिज़ाज में रहते हैं।
शुक्रिया जिंदगी! हम ये हुनर सीखते हैं।
कागज़ों पर रोते और कलम से हंसते हैं।
हम कलम से बस खुद का इलाज करते हैं।
और देखो ! लोग पढ़कर वाह वाह करते हैं।...…..
✍️🙏🌅 ऋतु बाजपेई

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