तुम कितनी समझदार हो गई हो,
कल छोटी सी प्यारी गुड़िया थी---
नन्ने नन्ने पैरों से जब मेरे आंगन आई थी,
तेरी प्यारी सूरत देखकर मै,मन ही मन मुस्काई थी,
छोटे-छोटे पग से मैंने तुमको चलना सिखलाया था---
अब तुम थोड़ी बड़ी हो गई हो---
तुम कितनी समझदार हो गई हो,
कल प्यारी छोटी गुड़िया थी,आज मेरी फ्रेंड हो गई हो,
अपने मन की जब तुम मुझकोसारी बात बताती हो,
अच्छा लगता है मुझको मैं मन ही मन मुस्काती हूं,
बड़े प्यार से मैं तुमको जब सही राह दिखलाती हूं,
कभी तुम्हारे साथ खेलती कभी सख्त हो जाती हूं,
मां और बेटी का ये रिश्ता, बड़ा ही प्यारा होता है,
समस्त रिश्तो से हटकर ये तो, बड़ा ही न्यारा होता है,
कभी कभी मैं दोस्त की भूमिका, तेरे साथ निभाती हूं
और कभी मैं मां बनकर तुझको सही राह दिखाती हूं
संगीता वर्मा✍✍

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