'सा' को 'रा' से मेल हुआ तो 
सारा प्यार भरा तन-मन
झूम रहीं रिमझिम वर्षा में 
"रश्मिरथी" का यह उपवन
'सा' को 'रा' से........


          नाच रहीं,मेघों के बादल
          हुँकार भरी नदियाँ भी 
          फूलों ने मुस्कान भरी है
          "रश्मिरथी" का यह जन-गण
          'सा' को 'रा' से........


आँगन में भी,अब भोर हुई 
'बाँसूरी' की धून की सहनाईँ
राह-बिछाये ताक रहीं अब 
"रश्मिरथी" की नैन हमारे
'सा' को 'रा' से........


          सुहानी 'राग' मेँहका गई
          'लाजवंती' की कलि प्रखार 
          इत़रा रहीं नभ में पवन अब
          "रश्मिरथी" का पाके गुलज़ार
          'सा' को 'रा' से........




      लेखक:- विकास कुमार लाभ
                     मधुबनी(बिहार)