तेरे साथ तो, बंजर जमीन भी,
हसीन ही लगती है।
उदास शाम का मजा,
दुगुना हो जाता है,
जब, तू साथ होता है।
मोहब्बत करके,
फिर, मोहब्बत को पा लेना,
ऐसा गर हो जाए तो,
हर लम्हा ही हसीन रहता है।
हम भी अब, मदमस्त,
हवाओं की तरह,
बहना चाहते हैं।
कुदरत की इन हसीन, वादियों में!
बस तुम्हें, खबर ना हो!
हम ता उम्र तेरे दिल के,
किसी कोने में,
रहना चाहते हैं।
श्वेता कर्ण!

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