नीरू को अपनी छाती से चिपकाऐ,चन्द्रेश भी फफक कर रो पडा,नीरज अब और पास आ गया !
चन्द्रेश ने बाहें फैला दी,नीरज की और नीरज भी सीने से चिपक गया,दोनो बच्चों को छाती से चिपकाऐ चन्द्रेश,,,
बहुत कुछ खो चुका था।उसे बस सब तरफ दमयंती की छवि ही दिखाई दे रही थी।""""
मधु,,, माँ के साथ खाना लेकर आयी थी"""
नीरज को मधु ने समझाकर खिला दिया था।और नीरू को समझाकर खिलाने की कोशिश कर रही थी।
मधु,,,नीरू बस एक ही निवाला खा ले """""
नीरू """नही मधु मत जिद कर ,आज हम अनाथ हो गये!
और कोई वक्त होता तो मधु नीरु को बहुत कुछ सुना देती"
पर आज वो नीरु का दुःख समझ रही थी""""
चल ठीक है,पर तेरे न खाने से,माँ वापस आ जायेगी,माँ वहाँ दूर आसमान से देख रही होगी """"कितनी दुःखी होगी की मेरे बच्चों ने कुछ नही खाया ।
चल अब खा ले """""हाँ बेटा दमयंती भाभी ,बहुत दुखी होगी"अब तक मधु की माँ भी पास आ गई थी """और प्यार से नीरू के सिर पर हाथ फेरती हुई समझा रही थी"""""
अन्टी ,नीरू सुबक पडी,कब से मधु ने खुद को सम्भाल रखा था।पर अब ,मधु के सब्र का बाँध टूट चुका था"""""
और वो भी कब तक खुद को रोक पाती """"
नीरु,को गले लगाकर सिसक पडी मधु"""
सुबह होते ही,कुछ बडे ,बूढे चन्द्रेश के घर के सामने इकट्ठे होने लगे""""
काका""""चन्द्रेश""""" चन्द्रेश ने गरदन उठाई ,,उसकी आँखे रक्तभ हो गई वो बाहर ही अकेले  पूरी रात बैठा रहा """"
और खुद से ही शिकायते कर विरह वेदना ,मे सिसकता रहा"
काका ने पास जाकर सिर पर हाथ फेरा "बेटा चलो उठो सूर्य उदय से पहले ,अस्थि संचय करना है"
चन्द्रेश की आँखे ,फिर से खुद को न रोक सकी"""""और आँसुओ की बूँदे उफान पर आ ग ई """"""
चलो काका """"शर्ट की आस्तीन से अँसुओ को पोछते हुऐ उठकर खडा हो गया चन्द्रेश """"कृमशः आगे जारी भाग -7


         रीमा ठाकुर


प्रिये 🙏पाठकों,आपको ये भाग कैसा लगा,आपसे अनुरोध
है,आप समीक्षा मे जरूर बताऐ🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼