इश्क़ मोहब्बत क्या हैं
ये समझाया तुम्हारे साथ ने
दर्द से भी इश्क करना
सिखाया तुम्हारे इंतिज़ार ने
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इश्क़ का नाम तो सुनी थी
पर इश्क़ से बेख़बर थी
प्यार पर यूं भरोसा करना
सिखाया तुम्हारे एतबार ने
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मोहब्बत की गलियों में बेख़ौफ़ घूमना
जमीं पर रह कर यूं गगन चूमना
जिंदगी को जिंदादिली से जीना
सिखाया तुम्हारे मोहब्बत ऐ इक़रार ने
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बड़ी नाजुक सी मैं इक कली थी
बड़े लाडो से मैं पली थी
कली से परिपक्व फूल बनना
सिखाया तुम्हारे इश्क़ और इज़हार ने
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थ्रीमा विनोद साहू

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