हे हंसवाहिनी, ज्ञानदायिनी
वीणावादिनी शारदे
मिटे अज्ञान अन्तस् का मेरे
कुछ ऐसा तू वर दे-----
काम- क्रोध की ज्वाला को
मेरे अंतर्मन से हर ले
शीतल, निर्मल ,पावन सा
ह्रदय को मेरे कर दे
मिटे अज्ञान अन्तस् से मेरे
कुछ ऐसा तू वर दे-----
अपनी वीणा के सुर से माँ
जग की जड़ता को हर ले
मिले बुद्धि,विकास हो सबका
कुछ ऐसी दया तू कर दे
मिटे अज्ञान अन्तस् का मेरे
कुछ ऐसा तू वर दे------
हम जड़- बुद्धि नादान से
बालक,दया हम पर भी कर दे
हो जाये उद्धार मेरा भी
अपनी कृपा दृष्टि कर दे
मिटे अज्ञान अन्तस् का मेरे
कुछ ऐसा तू वर दे----
हे हंसवाहिनी, ज्ञानदायिनी
वीणावादिनी शारदे
मिटे अज्ञान अन्तस् का मेरे
कुछ ऐसा तू वर दे-----
आशा झा सखी✍🏼✍🏼✍🏼✍🏼

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