बसंती रंग हवा में जो लहराया।
सपने भी बसंती हो गये।
होठों पर रूक रूक आए हँसी ।
माँ का आँचल में जब हम छिप गये ।

यादें रूमानी हो गयी। 
संगीत मन में झंकृत हुआ। 
वीणा सा साज बजने लगा।
जो माँ ने सिर पर हाथ रखा।

कंठों से निकले कोयल की कूक। 
पपिहा मन का शोर करने लगा।
मचल मचल दिल गाए गीत। 
विद्या का दामन जब से थाम लिया। 

नहीं चाहिए साथ अब किसी और का।
काफ़ी मेरी माँ का आशीर्वाद है।
जो रहे हमेशा मेरे साथ। 
ऐसी वरदायिनी का वास है। 

जादू ही जादू बस गया।
खण्ड हुए जीवन में। 
घर में रहूँ या बाहर। 
मन तृप्त हो संतुष्टि की धरोहर पा लिया।

नीलम गुप्ता🌹🌹 (नजरिया )🌹🌹
              दिल्ली