जिंदगी सतरंग तो बन गई है इंद्रधनुष की तरह सात रंगों में बिखर गई है। ना जाने और कितने रंग देखने को मिलेंगे जिंदगी में ।पतझड़ आने के बाद बसंत आती है पर जिंदगी मेपतझड़ खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है।
ना जाने कितने सपने सजा कर रखे थे हमने चकनाचूर कर दिया जिंदगी में मेरे सपने। हमने भी कुछ सपने बुने थे इन आंखों में हसीन सपने देखे थे आज टूटते हुए सपने दिल को तोड़ रहे हैं ‌ दिल कचोटना है जब लोगों को सपने पूरे होते हुए देखते हैं मेरा भी मन मचलजाता है दुबारा सपनों को पूरा करने के लिए लाख पंख फड़फड़ाऊ पर बार बार सपने टूट जाते हैं। जिंदगी पतझड़ बनकर ही रह गई हमारी। कभी टूट कर कभी कचट कर रह गई अधूरी सपने।  उम्मीद की किरणें हमने भी नहीं छोड़ी है मेरे सपने कभी जरूर पूरा होंगे हमारे घर में भी बसंत आएंगे हमारे घर में भी दोबारा खुशियां दस्तक देगी। हे रब दुआ है हमारी हमारे घर में भी खुशियां आगमन हो हमारे भी सपने पूरी हो।.....


                 सपना कुमारी 
                  बिहार पटना