कर्नाटक में छोटा सा ही गांव जो शहर से बहुत दूर था
वहां एक कॉफी का बगीचा था।
जिसकी देखरेख करने के लिए विलियम को भेजा गया था।
जिस कोठी में विलियम के रहने का इंतजाम किया गया था। वहां रामरति काम करती थी जो 22 साल की जवान महिला थी। रंग जितना गहरा उतने ही तीखे नैन नक्श,
सुंदर सुडोल कद काठी,
रामरति सुबह सवेरे कोठी पर आती सारा दिन काम करती शाम को घर वापस जाती।
कॉफी के बगीचों में उसका घरवाला प्रकाश काम करता था।
वे दोनों सुबह साथ में घर से निकलती और शाम को भी रामरति बगीचे की तरफ चल देती वही उसे प्रकाश मिलता।
रामरति और प्रकाश की ज्यादा अच्छी बनती नहीं थी जिसका कारण था घर की गरीबी, और 4 साल शादी के हो जाने पर भी कोई बच्चा ना होना।
दोनों कितनी ही मेहनत मजदूरी कर लेते ना कभी उनका कर्ज खत्म होता ना उन्हें भरपेट खाना नसीब होता।
बात बात में उलझ जाते हैं एक दूसरे को कटी जली सुनाते
झगड़ते, एक दूसरे से ही प्रेम करते हो सो जाते।
विलियम का ड्राइवर जिसका नाम हरीश था।
इंग्लैंड में विलियम का परिवार भी था उसकी बीवी और उसकी प्यारी सी बेटी।
किंतु यहां वह अकेला आया था।
पहले ही दिन से विलियम की रामरति पर नजर थी।
उसके हुस्न का दीवाना हो चुका था और हर हाल में रामरति को पाना चाहता था।
उसने धीरे-धीरे रामरति की तरह प्रेम का हाथ बढ़ाया
विलियम की बातों के जाल में रामरति फंसती चली गई।
तुम्हारी कदर नहीं जानता तुम्हारा पति...
तुम उसे छोड़ दो मैं तुमसे शादी करूंगा, मैं तुम्हें हमेशा खुश रखूंगा...
अब रामरति की तरफ से भी हरी झंडी मिली तो दोनों में प्रेम पनपने लगा।
हरीश विलियम का ड्राइवर था वह जानता था कि इसकी बीवी है बच्चा है और यह रामरति का केवल फायदा उठा रहा।
वह बहुत कोशिश करता कि किसी तरह रामरति को बता दें
किंतु अपनी नौकरी और जान दोनों से हाथ धोना पड़ सकता था वह विलियम से बहुत डरता था।
इस बात को 2 महीने बीत गए 1 दिन रामरति और विलियम में काफी देर से कहासुनी हो रही थी वह उसे शादी करने के लिए बार-बार कह रही थी कि अब मैं प्रकाश के साथ नहीं रह सकती।
मैं तुमसे प्रेम करती हूंँ, तुम्हारे साथ अपना जीवन बिताना चाहती हूंँ।
उनके लड़ाई झगड़े और प्रेम में इतना वक्त बीत गया कि अंधेरा छा गया।
उसने हरीश को कहा रामरति को घर छोड़ कर आओ।
बहुत हिम्मत करके उस दिन हरीश ने रामरति को कहा कि तुम गलत इंसान की बातों में आ रही हो।
रामरति ने उसे धमका दिया कि मेरे जीवन में ज्यादा दखलअंदाजी ना करो तुम क्या जानो मेरा पति बड़ा अच्छा आदमी है उससे लाख गुना विलियम है, मेरी इज्जत करता है,
मुझसे कितना प्यार करता है, शादी करेगा
तुम जलते हो ना मुझसे क्योंकि तुम भी मुझसे शादी करना चाहते थे पर मेरी शादी तो प्रकाश से हो गई एक सांस में रामरति हरीश को काफी कुछ सुना दिया।
और वे सड़क पर उतर गई कहने लगे आगे मैं पैदल चली जाऊंगी।
आते वक्त हरीश बीती दुनिया में चला गया
हरीश बहुत ही सीधा साधा लड़का है जिसे आप डरपोक कहे तो कोई अतिशयोक्ति न होगी
रामरति को पसंद करता था किंतु कभी कह नहीं पाया और उसकी शादी प्रकाश से हो गई ।प्रकाश दारूबाज है
उसकी शादी को 4 साल हो गए हैं रामरति को कोई बच्चा भी नहीं हुआ।
वह रामरति की कमाई को भी छीन लेता है, उस पर हाथ भी उठाता है और गाली गलौज तो ऐसे देता है जैसे कोई साधारण बात कर रहा हो उससे।
कभी-कभी हरीश जब रामरति को इस दुख में देखता तो सोचता समय पर रामरति को कह दिया होता। पर अब क्या हो सकता है।
हरीश अब इस दुविधा में है कि जो गलती उसने एक बार कि वह दोबारा नहीं दोहराना चाहता। विलियम जैसे खतरनाक व्यक्ति से वह रामरति को बचाना चाहता है जो एक ऐसे रास्ते पर चल पड़ी है जो उसे मौत की तरफ ले जा रहा है।
अब हरीश को दिन-रात यही तड़प रहती, कैसे बात करें रामरति को कैसे समझाएं?
अवसर मिलता, ना समय मिलता ऊपर से विलियम का डर
और इसी उधेड़बुन में वह एक-दो दिन काम पर नहीं गया उसने बीमारी का बहाना बनाया।
जब वे वापस काम पर आया तो उसने रामरति को रोते हुए घर से निकलते देखा।
बहुत कुछ पूछना चाहता था, कहना चाहता था लेकिन रामरति एक सेकेंड के लिए रुकी उसकी तरफ देखा और फिर रोती हुई भाग गई।
विलियम से कुछ पूछने की हरीश की हिम्मत नहीं थी।
अगले दिन रामरति काम पर नहीं आई हरीश को सारा दिन
उसका इंतजार रहा।
वही कोठी के पीछे एक कमरे में हरीश रहता था उसका गांव में आना जाना नहीं होता था।
विलियम को गाड़ी में बिठा कर कॉफी बींस के बगीचों में ले जाया करता था।
जब प्रकाश को वहां देखता तो कई बार उसका मन करता कि वह प्रकाश को ही बता दे फिर सोचता है इससे तो रामरति की मुसीबत और बढ़ जाएगी।
अगले दिन सुबह विलियम हरीश को लेकर स्टेशन गया और वहां से अपनी बेटी और पत्नी को लिया।
रामरति काम पर आई उसके होश उड़ गए।चेहरे से साफ पता चल रहा था की मालकिन और उसकी बेटी को देखकर वह हैरान और परेशान है।
करीब 15 दिन मालकिन और बेटी वहां रुके और फिर वह वहां से दिल्ली चली गई।
रामरति ने उनकी बहुत देखभाल की सारा काम किया और उनका दिल जीत लिया।
फिर अगले दिन रामरति रात को कोठी पर आई और वह विलियम से खूब झगड़ा करने लगी कि तुमने मुझे बताया नहीं तुम्हारी एक पत्नी है, बच्ची है फिर तुम मुझसे क्यों शादी करोगे
विलियम ने उल्टा इल्जाम रामरति पर लगाया कि तुम भी तो शादीशुदा हो।
रामरति ने रोते हुए कहा लेकिन मैंने तुम्हें बताया था ना मैं पेट से हूंँ तुम्हारे बच्चे की मां बनने वाली हूंँ, शादी करने के सिवाय और कोई चारा नहीं है तुम्हारे पास
जोर जोर से रो रही थी चिल्ला रही थी।
हरीश सब सुन ना सका और वह टूट सा गया अंदर से और चुपचाप अपनी कोठरी में जाकर करवटें बदलने लगा।
घंटा बीता था या 2 घंटे उसे पर नींद अभी तक नहीं आई थी। तभी अचानक उसके दरवाजे पर किसी ने जोर से खटखटाया उसने दरवाजा खोला तो सामने विलियम को खड़े पाया।
विलियम ने कहा गाड़ी लेकर जल्दी आओ।
हरीश गाड़ी ले आया।
हरीश की आंखें रामरति को ढूंढ रही, उसके कान उसकी आवाज सुनना चाहते थे उसे लगा कि इतनी रात को या तो मुझे रामरति को घर छोड़ने के लिए बुलाया है पर वह कहीं दिखाई नहीं दे रही?
विलियम ने हरीश को धमकाते हुए अंदर बुलाया
और एक बड़े से बक्से को उठाने के लिए कहा दोनों ने मिलकर उसे गाड़ी में रखा।
हरीश बहुत डरा हुआ था वह विलियम से बहुत कुछ पूछना चाह रहा था पर इससे पहले विलियम ने उसे आदेश दिया गाड़ी जंगल की तरफ ले चलो।
हरीश पसीना पसीना हुए जा रहा था। उसे किसी बात का डर था लेकिन मैं सोच रहा काश! मेरा शक गलत हो जो मैं सोच रहा हूं वह ना हो।
जंगल के पास एक झरना था वह गाड़ी रुकवा कर विलियम ने उस बक्से को खुलवाया तो उसमें रामरति थी हरीश के मुंह से चीख निकल गई।
विलियम ने कहा इसे झरने में फेंक दो।
हरीश क्रोध में पागल हो गया और उसने विलियम को पीटना शुरू कर दिया।
विलियम ने एक गोली हरीश के माथे में दाग दी।
और उसे भी झरने में
पर फेंक दिया...
अगली सुबह जब रामरति घर पर नहीं पहुंची तो उसका पति प्रकाश आसपास पूछने गया। पूरे गांव में वह नहीं मिली तो वह कोठी पर पूछने आया विलियम ने कहां कि वह तो काम पर कल आई ही नहीं थी।
प्रकाश ने कहा उसकी तबीयत ठीक नहीं थी लेकिन वह शाम को तो आई थी कह रही थी कि खाना तो बना कर ही आती हूंँ वरना साहब क्या खाएंगे?
लेकिन विलियम ने मना कर दिया पूरे गांव के लोग इकट्ठे होकर पूछने गए तो भी उसने लोगों को धमकाया और कॉफी के बगीचे से निकालने की बात कह दी।
गांव वाले चुपचाप चले गए शक तो सबको विलियम पर कोई मुंह से बोल नहीं रहा था।
गांव वाले सोचने लगी रास्ते में जंगल में किसे जंगली जानवर ने उसे खा लिया होगा तो वे उसकी लाश को ढूंढने चल पड़े पूरी रात में ढूंढते रहे उनको कुछ नहीं मिला अगले दिन सुबह-सुबह कुछ छोटे-छोटे बच्चों ने 2 लाशों को झरने में तैरते हुए देखा।
और यह बात जंगल में आग की तरह फैल गई कि विलियम का ड्राइवर हरीश और रामरति की लाश एक साथ झरने में मिली।
विलियम ने साफ कह दिया कि रामरति हरीश के साथ भागना चाहती थी और हो सकता है गांव वालों के डर दोनों ने आत्महत्या कर ली।
कॉफी बगीचे में काम करने वाले सभी मजदूरों ने विलियम्स की हां में हां मिलाई जबकि उनको हरीश के माथे पर लगी गोली का निशान दिखाई दे रहा था और सबको पता था यहां पिस्तौल केवल विलियम के पास है।
प्रकाश रोया और अगले दिन सभी गांव वाले चुपचाप कॉफी बींस के बगीचे में काम करने चल पड़े गहरा सन्नाटा गांव में फैला हुआ था।
वंदना शर्मा

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