नारी की है अजब कहानी।
दिन भर करती सारा काम,
नहीं करती तनिक आराम।
दर्द सहती कभी कुछ न कहती।
कभी अपने मन की ना करती,
करना भी चाहती तो ये पुरुष प्रधान समाज उसे अपने मन की न करने देता।
खुशी सबके साथ बांटती,पर दर्द अपने दिल में ही छुपाए रखती।
ये जालिम जमाना क्या जाने नारी की पीड़ा?
नारी का हाथ पकड़ना ही काफी नहीं उसे था
मे रखना भी जरूरी है।
प्रेम ही नहीं बस नारी के साथ जीना जरूरी है।
हरप्रीत कौर

6 टिप्पणियाँ