जी भरकर संग हंस लो, ये बहुत रुलाएंगे।
जब संग बीते ये पल, बस यादों में होंगे।
ये साथ चाय पीना, ये साथ साथ पढ़ना।
ये मिल बांट खाना, ये पूछना और बताना।
ये छुट पुट से झगड़े, करने को तरसेंगे।
जब संग बीते ये पल, बस यादों में होंगे।
कुछ याद रखेंगे हम,कुछ शायद भूलेंगे।
जीवन की राहों में, जब हम आगे होंगे।
इन राहों में चलते, जब भी मिल जाएंगे।
ये संग बीते सब पल,तब फ़िर से सिमटेंगे।
ज़ी भर कर संग हंस लो, ये बहुत रुलाएंगे।
जब संग बीते ये पल, बस यादों में होंगे।
जब भी थक बैठेंगे, खुद से मिल पाएंगे।
जज़्बातों की दौलत, तब फ़िर से ढूंढेंगे।
तस्वीरों में सिमटे, फिर पन्ने उलटेंगे।
जब संग बीते ये पल,बस यादों में होंगे।
मुठ्ठी में हम भरते, जो रेत सा न होता।
इन वक्त की लहरों पर,गर अपना बस होता।
यादों के ये पन्ने, चुन चुन के सहेजेंगे।
जब संग बीते ये पल, बस यादों में होंगे।
ज़ी भरकर संग हंस लो, ये बहुत रुलाएंगे।
जब संग बीते ये पल, बस यादों में होंगे।
मेरे सबसे प्यारे दोस्तों को समर्पित
....✍️🙏🌅 ऋतु बाजपेई

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