⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘
एक स्वप्न संजोया आंखों में,
बच्चों ने जन्म लिया था जब,
क्या खूब सजाया घर को,
क्या खूब मिठाई बांटी थी,
एक जश्न मनाया जी भर के---
दौलत क्या खूब लुटाई थी, 
बच्चों के जन्म दिवस पर--- 
जी भर कर खुशियां मनाई थी,
मां-बाप की आंखों के तारे---
जब बच्चे बन जाते हैं,
यह जिगर के टुकड़े---
जीवन के सहारे बन जाते हैं,
उनकी उम्मीदों का अक्सर---
गला क्यों घुट जाता है,
 बुढी होती है जब माता---
पिता बुढा जब हो जाता है,
उसके पालन-पोषण में---
 कोई कमी नहीं आने देते,
कमा कमा कर पाई पाई को---
बच्चों पर जान लुटा देते,
 बच्चों  के सपनों को--- 
पूरा करने की रस्म निभाई थी,
 हंसते-हंसते ये  फर्जी की रीत--- 
मां-बाप ने निभाई थी, 
बच्चों की सपनों की खातिर--- 
खुद को अनदेखा कर जाते हैं,
 उनके भविष्य की खातिर--- 
मेहनत में जुट जाते हैं,
 मां की सारी उम्र---
 रसोई में गुजर जाती है,
 और पिता की भविष्य की---
 चिंता में निकल जाती है,
 परवरिश करते करते---
 ना जाने कब पंख लगाकर---
 जवानी उड़ जाती है,
छा जाती बालों में चांदी---
 आंखें बूढी हो जाती है,
 जीवन एक संघर्ष है---
सब जीने का बहाना है,
 अपना कर्तव्य खुशी खुशी---
 जीते जी निभाना है,


  संगीता वर्मा✍✍