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इतना आसान नही है ,,
मंजिलों को हासिल करना"
बंदिशें,रोक लेती है,
बढते कदमो को""""
कभी ,सोचते है,
थक कर रूक जाये"
उम्मीदे, टूटने नही,
देती सपनो को"""
सभी अपनी जगह"
सही है, तो गलत क्या है""
डोर जो मन से जुडी है"
छोडती नही, किसी अपनो को""
शब्दो,से गागर भरने का """
हुनर, है  मुझमे""""
नदिया तरशती है"
सागर से मिलने को""
जो प्रेम है,तो"प्रलाप क्यू है,,
पलको,मे असुओं की धार क्यू है""
जो मिलना,बिछडना नियति है""
तो क्यू तरसे ,मिलने को"""



   रीमा ठाकुर (लेखिका)