गोकुल के चौराहों पर
बरसाने की राहों पर
वृंदावन की कुंज गली में
माखन की मटकी लिए
कभी पनघट कभी वंशीवट
कभी यमुना तट
बिखराए लट
बांध के पायल
ए री सखी मैं तो घायल
प्रेम में पागल
पहन के घुंघरू
हाथ में शिव का डमरू
ढूंढत ढूंढत वन वन फिरूं
ए री करूं तो मैं क्या करूं
ओ सांवरिया गर तु ना आए
जीवन की शाम ढलने से पहले
तन से प्राण निकलने से पहले
तो मेरे सांवरिया मैं यमुना जी में जा डुब मरूं।।
अरे सांवरिया क्या रखा है झुठी मरोड़ में
मर जाऊं पर ना जाऊं कभी हाथ तेरा छोड़ मैं।।
पिंटू कुमावत'किरण'🙏🙏💐💐

2 टिप्पणियाँ