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जीवन रैन बसेरा है,

ना तेरा है ना मेरा है,

कर्मों की गठरी अपनी है,

बस यही संजोके रखनी है, 

सांसों की माया है इसमें, 

वह भी गिन के लाए हैं,

तन की कोठरी में देखो, 

सांसों की कच्ची डोरी है,

टूट जाए तो छूट जाएंगे,

इस मिट्टी में मिल जाएंगे,

जीवन रैन बसेरा है,

ना तेरा ना मेरा है,

      संगीता वर्मा✍✍