तलाश है हमें,उस दिन की
जब मिलेंगे हम शुभ प्रभात
वादों के,उन लम्हों को याद करके
लौटेंगे हम पूनम की रात
तलाश है हमें......
बिछड़ते ही,आते हैं आँखों में पानी
जुदाई की काँटे,कैसे सहेंगे हम
लड़ते रहेंगे,'किस्मत' से जब तक
क्या?मिल जाऐंगे हम एक-साथ
तलाश है हमें......
'बैचेन' कर देतीं है,उनकीं अदायें
वो डाँटतीं,मीठी सी बातों में
'कुदरत' की उस मुस्कान में
हँसती थीं,कई देरों की रात
तलाश है हमें......
जन्मों की तार,जुड़ी है उन्हीं से
मुमकिन नहीं है,छोड़ना
जब तक रहेंगे,साथ में
नाते दिलों का,ना तोड़ना
तलाश है हमें......
प्यार के नाते,होते हैं कुछ ऐसी
मुश्किल में ही,कभी जुटता
आँधी हो,या बिजलीं की तड़कन
ये कभी ना झूकता
तलाश है हमें......
लेखक:-विकास कुमार लाभ
मधुबनी(बिहार)

0 टिप्पणियाँ