अब तो ख्वाबों में ही देख पाते हैं तुम्हें
हकीकत में कहां अब दीदार होता है…
लगा कर तेरी तस्वीर को अपने सीने से
तेरी याद में खोया तन्हा दिल भी रोता है…
आज भी मेरे इस दिल को कहीं ना कहीं
तेरे लौट कर आने का इंतजार होता है….
कसूर नहीं इसमें किसी और का ज़रा भी
काटा वही जाता है जो खुद बोया होता है….
तकदीर के खेल का भी अजब तमाशा है
वही नहीं मिला करता जो अजीज होता है….
राजू लधरोइया

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