खुद से प्यार हो गया, मेरे सजना,
तेरे प्यार का, था आलम,
तेरा वज़ूद, मुझमें समा गया,
खुद से प्यार.....
तेरी उन अदाओं की, मेरे सजना,
तरतीब का, वो आलम,
तेरा वज़ूद, मुझमें समा गया,
खुद से प्यार.....
तेरी दयानतदारी की, मेरे सजना,
नेकनीयती का, वो आलम,
तेरा वज़ूद, मुझमें समा गया,
खुद से प्यार.....
तेरी बरक्कत दिन दूनी, मेरे सजना,
तेरी साफगोई का, वो आलम,
तेरा वज़ूद, मुझमें समा गया,
खुद से प्यार.....
तेरी जिंदगी में हम आये, मेरे सजना,
जिंदादिली से जीने का, आलम,
तेरा वज़ूद,जीना सिखा गया,
खुद से प्यार.....
प्यार दिया तूने मुझे इतना, मेरे सजना,
रब से मांगी दुआओं का, आलम,
तेरा वज़ूद, रब को भा गया,
खुद से प्यार.....
खुद से प्यार हो गया, मेरे सजना,
तेरे प्यार का, था आलम,
तेरा वज़ूद मुझमें समा गया,
खुद से प्यार.....।
काव्य रचना -रजनी कटारे
जबलपुर (म. प्र.)

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