हर मांँ का अरमान होता है
बेटा बहू मांँ के पास सदा रहे
हर मांँ की चाहत होती है
फिर बेटा क्यों
मांँ के साथ रहने से जी चुराता है
मांँ तो स्वयंँ को कष्ट देकर
अपने बच्चों को है पालती
खुद भूखे पेट सो जाती
अपने अरमानों को कुचल कर
अपने बच्चों की जिद्द को पूरा है करती
मांँ अपनी जिम्मेदारियों
को बखूबी है निभाती
बच्चे बड़े होते ही
मांँ से क्यों किनारा है कर लेते
बूढ़ी मांँ अपने बच्चों से अरदास है करती
बेटा मुझे घर में रहने के लिए
एक कोना ही दे देना
कभी घर से बाहर से
निकलने को ना कहना
रूपए पैसे का लालच नहीं मुझे
अब थोड़ी बूढी हो गई हूंँ मैं
तुम दोनों पति-पत्नी
मुझे थोड़ा प्यार और इज्जत ही दे देना
यही अभिलाषा है मेरी
धन्य हो जाएगा जीवन मेरा
रूखी सूखी जो मुझे
बहू है खिलाएगी
सच कहती हूंँ
मैं चुपचाप खा लूंँगी
तेरे बचपन को तो
मैं जी ना पाई
फर्ज के आगे समय
निकाल न पाई
देखना चाहती हूंँ
तेरा बचपन
तेरे बच्चों में
लाड प्यार करना चाहती हूंँ
अपने नाती नातिन के संँग
जो मैं रूठ जाऊंँ
मेरे पोते पोती मुझे मनाएँ
घर में प्यार और खुशियों
की बहार है आए
शिल्पा मोदी✍️

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