संजीवनी क्या है??
गरीब और,
जरूरत मंद की,
मदद है,
संजीवनी!
दुखी और, उदास,
लोगों के चेहरे,
पर खुशी लाना,
है, संजीवनी!
प्रेम, दोस्त, और,
परिवार!
संजीवनी ही तो है,
जीवन रूपी,
नाव को पार,
लगाने में!
जिस मिट्टी में,
पली बढी,
उस, मिट्टी से,
अलग होकर भी,
तेरे प्यार का,
सानिध्य पा,
मैं, हरी भरी, ही रही!
तुमने मुझे मुरझाने,
ही नहीं दिया!
परिवार में,
मिलकर रहने,
का, यही, फायदा,
मुझे मिला!
पूरा परिवार,
और तेरी चाहत,
मेरे लिए,
संजीवनी का,
काम करती है!
ये सिर्फ मेरी,
बातें नहीं है,
हर किसी के,
जीवन की यही,
हकीकत है!
प्रेम रूपी,
संजीवनी न मिले!
तो, जीवन का,
सफर जरा,
मुश्किल हो,
जाता है!
श्वेता कर्ण!

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