विश्व की प्राचीन भाषा,
सरल और समृद्ध भाषा,
गर्व है,हूँ मैं हिंदीभाषी,
हिंदी है मेरी मातृभाषा।
देश की संस्कृति की छवि,
संस्कारों का प्रतिबिंब है,
विनयपूर्ण शब्दों से सज्जित,
यह भाषा शान-ए-हिंद है।
मधुरता और सरसता का,
वेग है, ये प्रवाह है,
मेरे देश की राष्ट्रभाषा,
यह देशभक्ति का भाव है।
इसके महत्व को भूलना न,
गौरव की यह परिभाषा है,
रहे सदा मातृभाषा का मान,
यह हिंदी की अभिलाषा है।
सिर्फ एक भाषा नही,
हिंदी मेरी पहचान है,
यह मेरा अभिमान है,
मेरी शक्ति है,सम्मान है।
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प्रीति ताम्रकार
जबलपुर

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