बीती हुई बातो को
कुछ उन से हुई मुलाकातों को
सीने से लगा कर आज भी
मैंने रखी है कुछ टूटी हुई
तस्वीरों को
राते काली नागिन सी
डसती हुई जवानी सी
मुझे को घायल कर देने
वाली अदाए भी थी उस की निराली सी
उसकी एक मुस्कान पर
फ़िदा हो गई थी मै
एक उसके पास रहने के
लिए सब से जुदा हो गई मै
वफाएं हर एक से निभाया
दिल अपना मचलाया
उसने राते गुजारी अपनी
हर एक से दिल बेहलाया
मेरे सामने ही फ़ितरे
दुसरो पर कसा करता था
नैनो के तीरों को चला के
ज़माने मे आग लगता था
दिल मे वेबफ़ाईयों की
आंधी चलने लगी दिल के पन्ने
एक एक के बिखरने लगे
सूखे पत्ते की तरह हवाओं मे उड़ने लगा
उलझी सी ज़िन्दगी ताश के
पतों की तरह टूट कर बिखरने लगी
बहारों मे मौसम मे भी
पतझड़ सी दिखाने लगी
तस्वीरें क्यों आज फिर
आँखो से गुजरने लगी
जो बिखर गई थी यादें
गुजरे हुए मौसम को क्यों सताने लगी
आलिया खान ..........

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