सच ही कहा था देखके मेरा हाथ फकीरों ने,
मोहब्बतों का समन्दर भर देगा तेरा हमसफ़र तेरी तकदीरों म
पर इतना मालुम है तुम शामिल हो,
मेरी हकीकत की तबीरों में।
तुमसे ही है बजूद मेरा बरना मै कुछ न,
तुम शामिल हो मेरी वेशकीमती जागीरों में।
सारी दुनिया जूठी और फरेबी है बस तुम,
ही हो जो साथ हो मेरे सारे गम और खुशियों में।
भर आती हैं पलके मेरी तेरी वेपनाह मुहबतों पर,
फर्क नही पड़ता तुम हो या नहीं मेरी लकीरों में।
तुम साथ मेरे यों ही चलना कभी बदलना,
साजन मेरे मैने तुमको पाया बड़े नसीबों में।
तुम मेरी सुबह की अर्चना तुम्ही शाम की संध्या,
मेरा खुदा मेरे दिल में है क्यों ढूंढू मैं मन्दिर और मदीनो में।
अंजू दीक्षित,
बदायूँ ,उत्तर प्रदेश।

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