वो खफा है न हमसे खफा ही रहनो दो
जिद पे अड़े हो अपनी अकड़ मे ही रहने दो
मनाने भी नही आएंँगे अपनी मनमानी.मे अड़े रहो
याद मेरी आएगी तब भी याद के खयाल मे पड़े रहो
गृहमंँत्री हुँ अपने घर की तुम्हारी तानाशाही सहेगें नही
वो खफा है न हमसे खफा ही रहने दो
जो हम रूठ जाएंँगे तुमसे मना पाओगे नहीं
मिन्नत करो या भोली शक्ल बनाओ या पावँ पड़ो भाव देगें नहीं
मूड नहीं है कहकर तुमसे दूर चले जाएंँगे
बहुत सताते हो न बेवजह मुझे
जब बतियाने आओगे न मुहँ बिचकाकर चले जाएंँगे
बुला बुलाकर थक जाओगे तब भी नहीं आएंँगे
आसमांँ की गोद मे जाकर सो जाएंँगे
खटकते है न बहुत, करना बातें तारो से
तुम्हें मंँजनू बन देखकर खूब खिलखिलाएँगे
मोहल्लत देती हुँ सुधर जाओ नहीं तो
यही करके दिखाएंँगे
करो वादा खफा हमसे होगे नहीं
नहीं तो यही कहुंँगी
वो खफा है न हमसे खफा ही रहने दो
शिल्पा मोदी✍️✍️

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