अजीब है न!
सपनो का महल अपनो के निमित्त से बनता है,
और टूटता भी उन्हीं के निमित्त से ही है!!
निभा न सको तो मज़बूरी का नाम मत देना,
ख़ुद के सिवा किसी को इल्ज़ाम मत देना।
वक्त , वजह, लोग तो बदलते ही रहते है,
प्यार भी बदल जाये तो इबादत का नाम मत देना।
सुना था अपने तो आँखों को भी पढ़ लेते है,
बिन बोले ख़ामोशी को भी समझ लेते है,
फिर दिल पूछ उठा, क्यों वो लोग समझ न पाये,
बात तो अपनो की, जो ये तो कभी बन ही न पाये!
- *प्रियंका(पंखी)*🕊️✍🏻

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