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पूनम खुशियों की नयीं किरण
खुशबू मँहक रचती चमन
ज्योति जगत की चहक गई
पवन सितारों की नयीं पड़ी
पूनम खुशियों की......
      

        उनकी लहर समुद्र भी लायीं
        व्यापक कहर भी धूम मचायीं
        कलह-कलंत्र तुफानो को भायीं
        उसमें तेज़ी जीवों पड़ी थपाहीं
        पूनम खुशियों की......


        तरक गई कभी बिजली की जैसी 
        हवा चलने से जो ठड़ी 
        फूलों की तरह जब मुँसकाई 
        खिलती चेहरा प्राकृति बनायीं
        पूनम खुशियों की......


मिलन-मिलावट कमलगन सरकी 
बाँध मौन की तरकी-फरकी
पूनम प्यार सी लवों पे लहकी 
विश्वास लगन की तोड़ दे सिकड़ी 
पूनम खुशियों की......



      लेखक:-विकास कुमार लाभ
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