कवि विद्यापति तो सभी लोग जानते होंगे। मैथिली के बहुत बड़े कवि विद्यापति, भगवान शंकर के परम भक्त। उन्होंने भगवान शंकर के लिए अनेकों गीत, काव्य की रचना की।
विद्यापति जी का जन्म स्थान बिहार राज्य के मधुबनी जिले
में स्थित "विस्फी" गाँव में हुआ था। कहा जाता है कि,
कवि विद्यापति के पूजा से प्रसन्न होकर भगवान शंकर खुद
उनके पास नौकर बनकर रहने लगे थे।
एक बार कवि विद्यापति के घर, एक लड़का " काम " माँगने
आया। विद्यापति ने उससे नाम पूछा तो उसने अपना नाम
"उगना"बताया। विद्यापति जी ने उगना को अपने घर के काम और पूजा पाठ का काम करने के लिए रख लिया।
उगना घर के सारे काम करता, विद्यापति जी के पूजा पाठ के बर्तन धोता।
एक बार विद्यापति जी उगना के साथ काशी (बनारस) तीर्थ करने निकले। जब वो काशी पहुचे तो बीच रास्ते में उन्हें प्यास लगी।
विद्यापति जी ने उगना से कहा! उगना मुझे बहुत प्यास लगी है!! यहाँ कहीं जल ( पानी) है तो मुझे लाकर दो। प्यास के मारे मेरी जान जा रही है।
उगना महादेव, चले जल लाने। कुछ दूर जाकर जब वो विद्यापति जी के आँख से ओझल हो गये तब उन्होंने अपने असली रूप में आकर अपनी जटा से गंगाजल निकाल कर
ले आये विद्यापति जी के पास।
विद्यापति जी की जल पी कर जब संतुष्ट हुए तब उन्होंने उगना से पूछा, उगना तुम यह जल कहाँ से लाये हो!ये तो गंगाजल है। मुझे बताओ इस निर्जन वन में तुम्हें गंगाजल कहाँ से मिला। कौन हो तुम मुझे बताओ।
विद्यापति के जिद के आगे महादेव शंकर शम्भू अपने असली रूप में आ गये। विद्यापति जी भगवान भोले नाथ
के चरणों में गिर गये और अपने रोने लगे। भगवान शंकर ने विद्यापति जी से कहा! मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगा, बस मेरी असलियत तुम किसी से मत कहना नहीं तो मैं चला जाऊँगा। विद्यापति ने भगवान से कहाँ! प्रभु मेरी एक विनती है आपसे। जब मैं आपकी पूजा करूँ तो आप साक्षात् मेरे सामने हों। भगवान शंकर ने कहा ठीक है।
उगना और विद्या पति जी घर आ गये। अब विद्यापति जब
भी पूजा पाठ करने बैठते, उगना महादेव उनके सामने होते और जब तक विद्यापति जी ध्यान में रहते, उगना वहीं पर रहते।
एक दिन इसी तरह विद्यापति जी पूजा पर बैठे तो काफी देर तक ध्यान में बैठ गये और भगवान शंकर भी वहीं थे।
विद्यापति जी की पत्नी उगना को आवाज देने लगी। रे उगना! कहाँ मर गया, कितनी देर से आवाज लगा रही हूँ। अब भगवान करें तो क्या करें। कुछ देर बाद विद्यापति जी का ध्यान टूटा तब जाकर उगना जल्दी से आये और कहा। मालकिन क्या हुआ लेकिन तब तक विद्यापति की पत्नी
बहुत क्रोध में आ गई और चूल्हे की जलती लकड़ी निकाल कर उगना को मारने के लिए उठी। तब तक विद्यापति वहाँ आ गये और उन्होंने जोर से चिल्लाकर कहा। उन्हें मत मारो, साक्षात् महादेव। उनके इतना कहते ही महादेव
गायब हो गये। उसके बाद विद्या पति पागलों की तरह उगना
को ढूँढने लगे, पर महादेव वापस नहीं आये।
आज भी हमारे मिथिला में विद्यापति के लिखे गीत गाये जाते हैं और लोग उनकी और उगना महादेव के किस्से को सुनते सुनाते हैं। 🙏
श्वेता कर्ण!
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