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तू भी अधूरी, मेरा दिल भी कितना अधूरा हैं
हैं संग हमसफ़र, फिर भी इश्क न पूरा हैं.
तेरे संग भी कोई, मैं भी तो हूं किसी औऱ का,
ये दिल नादां क्यूं, फिर भी ख़्वाब तेरे देखता.
ऐ खुदा, ऐ खुदा, ऐ खुदा तू ही बता,,
ये ख्वाब अच्छा या बुरा
ये ख्वाब अच्छा या बुरा.......
ये हंसी ज़िन्दगी, ले आयी किस मोड़ पर हमें,
यहाँ खुशियां हैं, या मिल रहे गम हैं हमें.
मैं बस काट लू जिंदगी, या इसे जी लू ज़रा,
इश्क बिन ये दुनिया, अब लगने लगा बेसुरा.
ऐ खुदा, ऐ खुदा, ऐ खुदा तू ही बता,,
ये ख्वाब अच्छा या बुरा
ये ख्वाब अच्छा या बुरा.......
थोड़ी सी मुहब्बत, कर लेती वो मुझसे अगर,
हम कभी न बिखरते यूं इधर उधर..
मोहब्बत किसी और में ये दिल न कभी ढूंढता
इश्क की इक बूंद भी, वो .गर बरसा देती ज़रा
ऐ खुदा, ऐ खुदा, ऐ खुदा तू ही बता,,
ये ख्वाब अच्छा या बुरा
ये ख्वाब अच्छा या बुरा.......
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थ्रीमा विनोद साहू

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