मुझे ये खबर न थी कि तुम मेरे इश्क़ को वहम समझते हो।
मेरा तो हर पल तेरे लिए है।
तुम मेरे लिए अहम हो।
ख्वाहिश नहीं है तुम्हे पाने की,पर तेरी हर दुआ में शामिल होना चाहती हूं,सुना है रब दुआएं जल्दी कबूल करता है।
अब नाराज होना छोड़ दिया है
नजर अंदाज करके जिन्दगी जीना चाहती हूं।
तुमने मेरी खामोशी को मेरा गुरूर समझ लिया,कैसे समझाऊं तुझे जिस तरह आंखे बन्द करने से रात नहीं होती,उसी तरह बात न करने से और न ही मिलने से ये इश्क खत्म हो जाता।
साथ सोना ही इश्क़ नहीं है जनाब।ये तो रूह का रिश्ता है।




               हरप्रीत कौर