जो नियति मे लिखा है"
वो बदला ,जा नही सकता"
जो दिल मे,अहम् रक्खा"
सम्भाला ,जा नही सकता"

अगर मै,बूंद बन जाऊँ"
सीपी मे,समा जाऊँ,
बनूँ मोती ,धवल सा मै"
नकारा जा नही सकता"

प्रेम को जो समझते है"
हकीकत ,से परे है ,जो"
उसे जिस्मों,के रिश्तो से,
तौला  जा ,नही सकता""

यहाँ सब है,मेरे अपने"
तो ,ये अलगाव ,कैसा है"
चलाते बाण,शब्दभेदी"
भुलाया ,जा नही सकता"

ये कैसी ,रीति दुनियाँ की"
सभी ,अपने पराये है"
अगर फिसले जरा सा भी "
उठाया जा, नही ,सकता"""

कही पर पक्षी है, मायूस"
उसके पँख ,झुलसे है"
नमक,सब छिडकेगे लेकिन"
कोई, मरहम ला नही सकता"

जिसे जीवन दिया रब ने"
वही,उसको चलाऐगा"
गुमाँ ,मे भूल न जाना"
वो भुला ,नही सकता"

उसे ,तुम मान लो अपना"
तुम्हे ,वो अंक ले लेगा"
पहाडो ,सा हुआ जीवन"
वो ठुकरा नही सकता ""

मिलना और बिछडना "
ये ,रीति दुनियाँ की"
जिसे,गोदी खिलाया है"
वो पाला ,जा नही सकता"

कही,जुबान है,कडवी"
कही,ज्जबात ,कडवे है"
यहाँ पाषाण,है,निर्मित "
तोडा जा नही सकता""

जरा सी ,सोच उनकी हो"
जरा सी ,सोच मेरी हो"
अगर,भटके कही कोई"
छोडा. जा नही सकता""

कभी उनको,झुका दूँ मै"
जरा ,सा तुम भी झुक जाओ"
आग दिल मे,जलाओगे"तो"
कोई बचा नही 'सकता"

चलो ,अब खत्म कर दो"
खुद,को गिराना तुम"
तुम्हारे,बिना जिऐगे हम"
सोचा ,जा नही सकता"""





     रीमा ठाकुर(लेखिका)