बता क्या मिली मेरी खुशियां मिटा कर।
ज़माने  का  हर  दर्द मुझको अता कर।

सुनो  इस जहां की यही  है  रवायत।
निभाते हैं रंजिश नज़र से गिरा कर।

जिन्हे उम्र भर रब ख़ुदा हमने  माना।
वही जी रहे आज मुझको भुला कर।

जो  कहते थे हमसे की हम हैं तुम्हारे।
सरेआम हंसते  वो  मुझको रुला कर।

तुम्हे हक भुला  दो  हमारी मुहब्बत ।
मेरा क्या है हम तो हैं उल्फत के पैकर।

बहुत  टूटे  बिखरे  न भूले  कभी हम।
निभाई मुहब्बत हूं खुद को मिटा कर।

चली जाऊंगी तेरी दुनियां से इक दिन।
पता पूछोगे  तुम  हवाओं  से जा कर।

तेरी बेरुखी जान ले लेगी इक दिन।
मेरी मौत की  मेरे हमदम दुआ कर।

कटी  जिंदगानी  तेरी याद में  बस।
तेरी याद का संग शम्मा जला कर।

बुलाती  रही  उम्र  भर  दे सदाएं।
मेरी इल्तिज़ा तू कभी तो सुना कर।

रहो  ख़ुश  सदा तुम दुआ है हमारी।
ख़ुशी की हमारी न बातें किया कर।

मणि बेन द्विवेदी
वाराणसी उत्तर प्रदेश