मै आँगन की तुलसी।
तुम मेरे गुलाब बन जाना।
मै महकाऊँगी घर आँगन।
तुम खुशबू से घर हमारा महकाना।
कांटे तुम्हारे हम निकाल देंगे ।
तुम सींचना हमको प्यार के जल से।
विपत्तियों में हम मिलकर साथ।
बचाये अपना घर परिवार।
दादा दादी मात पिता से।
बनता है एक गमला।
प्यारे प्यारे बच्चे मिल।
बनाये सुन्दर फूलों का गुलदस्ता ।
फूलों से ही पहचान है।
उस बेजान गमले की।
रंग बिरंगे रंगों के फूलो से ।
जब सजे ये गुलदस्ता।
जब फूल मुरझाए तो ।
गमला भी अपना ।
अस्तित्व खो देता है।
पड़ा रहता एक कोने में।
कोई ध्यान नहीं देता हैं ।
नीलम गुप्ता🌹🌹 (नजरिया )🌹🌹
दिल्ली

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