विद्या की वरदायिनी माता
वीणा वादिनी तुम्हें प्रणाम
जो मां छेड़े मधुर संगीत
हृदय के पट खोल दे
गूंगा भी मीठी वाणी बोले
कानों में अमृत रस घोल दे
सुरीले गीतों से जब कभी
अमृत बरसता है
लबों पर जान हो जिनके
वातावरण खुशबू से महकता है
वास हो मां का जिनके कंठ में
उनकी तो क्या बात है
प्रबल इच्छा होश्रोता की
वह बारंबार सुनता है
यह आनंद वोआनंद है
जिसे खरीदा नहीं जाता
मधुरता आए वाणी में
कृपा से मां तेरी ही
शत्रु भी मित्र बन जाए
कृपा जिस पर हो मां तेरी
वरदायिनी माता
मुझे भी आशीष तुम दे दो
कंठ में वास तेरा हो
मधुरता आवाज में भर दो
सुंदर साज मेरा हो
दिल की कलम से
मधु अरोड़ा

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