आज 26 जनवरी के शुभ अवसर पर हमारे मुख्य अतिथि डॉ अविनाश वर्मा जी है जो कुछ घंटों बाद हमारे स्कूल में पधारेंगे। बच्चे स्कूल के प्रांगण में इधर उधर खेल रहे थे  । माइक पर स्कूल के प्रधानाध्यापक बता रहे प्रतिभा किसी के मोहताज नहीं होती लोग कहते हैं बच्चे बहुत मासूम होते हैं जैसा माहौल दोगे वैसे ही ढल जाएंगे बच्चों पर   वातावरण का बहुत जल्दी प्रभाव पड़ता है। डॉक्टर अविनाश वर्मा जी हमारे गांव के मुखिया जी के पोते हैं जैसा कि सबको पता है गांव में कुछ उग्रवादी तत्व गांव के पां च पॉच छ: लोगों को जिंदा जला दिया था। गांव में  मातम  पसर गया था लोग अपने इस गांव का नाम लेने से भी डरने लगे थे लोगों के अंदर इतना खौफ हो गया था की लोग गांव का नाम लेने में डरते थे अभी भाषण शुरू हुआ है था की गांव के बाहर सड़क पर तेज स्पीड में तीन चार कार आते हुए दिखाएं पड़ने लगी बच्चे खुशी के मारे चिल्लाने लगे चीफ गेस्ट आ गए सारे बच्चे शांत होकर कुर्सी पर बैठ गए जो बच्चे इधर-उधर घूम रहे थे वह सब भी लाइन लगाकर दरी पर शांति से बैठे गए। कुछ ही देर में डॉ अविनाश वर्मा गांव से बाहर एक भव्य स्कूल के पास पहुंचे ‌ बच्चे फूल की माला लिए हुए उनके स्वागत के लिए पहुंचे प्रधानाध्यापक खुद स्टेज से उतर कर डॉक्टर अविनाश जी के पास पहुंचे बच्चों ने बड़े  उत्साह के साथ ताली बजाते हुए उनका स्वागत किया। कार से उतरते हुए डॉक्टर अविनाश वर्मा और उनकी मां दादी स्टेज की ओर आगे बढ़ गए। प्रधानाध्यापक ने खुद डॉ अविनाश बर्मा जी की दादी के गले में फूलों की माला डालें। मुखिया जी की पत्नी की आंखों में खुशी के आंसू बहने लगे रीना अपनी सासू मां को खुश देख कर मुस्कुरा दी।  प्रधानाध्यापक ने चीफ गेस्ट के कुर्सी पर बैठने का इशारा किया।  बच्चे स्टेज पर जन गन मन गीत गाए कुछ देर बाद स्वागत गान गाया गया। प्रधानाध्यापक ने डॉ अविनाश वर्मा जी को स्टेज पर बुलाते हुए कहां बच्चों का आप मार्गदर्शक है बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए अपने बारे में कुछ चंद लाइने बताइए। डॉक्टर अविनाश वर्मा स्टेज पर कुछ सकु चाते हुए आते हुए आएं माइक पकड़ते हुए उन्होंने अपने बारे में बताएं सबसे पहले मैं आप लोगों शुक्रगुजार हूं जो आप लोगों ने मेरी इतनी भव्य तरीके स्वागत किया आप लोगों के प्यार ने अपने पैतृक गांव 25 वर्ष बाद लौटा हूं। डॉ अविनाश वर्मा ने एक शायरी पढ़ते हुए कहा  गांव की याद आती है बहुत मिट्टी की खुशबू की याद आती है बहुत घर आंगन में चौपाल पर खेला था बहुत आज आपने गांव बाले के प्यार से दिल खुशी से झूम उठा बहुत। यहशब्द कहकर डॉ अविनाश बर्मा एकदम से चुप हो गए फिर थोड़ी देर बादबोले बच्चों जिंदगी में कभी हार नहीं मानना जिंदगी संघर्ष का नाम है हार से डर कर मत भागना। अपने इरादे और हौसले मजबूत रखना चाहे जिंदगी के सफर में कितने भी इम्तिहान है मजबूती के साथ लड़ना। मुझे याद नहीं है पर मैं जब 5 साल का हो गया था अन्य बच्चों की तरह ही पापा के बारे में पूछता स्कूल में बच्चे चिढ़ाते इसके पापा है ही नहीं याद है मुझे बर्थडे के दूसरे दिन मुझे मां और दादी ने तिहाड़ जेल में पापा से मिलाया उस समय पापा को देख कर मैं डर सा गया था पापा की बढ़ी हुई दाढ़ी और जेल के कपड़ों में खूंखार क्रिमिनल की तरह लग रहे थे मेरा मासूम मन पर बहुत धक्का लगा सब के पापा प्यारे होते हैं मेरे पापा ऐसे गंदे से क्यों लग रहे हैं।मैंने मां से उसी समय पूछा मां पापा क्या जॉब करते हैं आपने तो कहा था पापा बहुत बड़ा नौकरी करते हैं। यह सुनकर जेल में पुलिसकर्मी लोग बहुत जोर से हंसने लगे और किसी ने कहा देखो हत्यारा का यही बेटा है। मुझे समझ में नहीं आ रहा था पर लोगों की घृणा की नजर से देखते हुए मुझे पता चल गया था यह जगह अच्छी नहीं है यहां बुरे लोग रहते हैं। पापा शर्म के मारे आंखें नीचे कर लिए। उसकी मां ने उसे गोद में उठा लिया और अपने आंसू प पोछते हुए जेल से बाहर आ गई। धीरे-धीरे मैं बड़ा होने लगा यह बात छुपने वाली है नहीं धीरे-धीरे मेरे आसपास मोहल्ले वालों  स्कूल में पता चल गया इसके पापा अपराधी हैं स्कूल में और पड़ोस में बच्चे उनसे खेलने में कतर आने लगे धीरे-धीरे इसी तरह उसके साथ भेदभाव किया जाने लगा पर उसने कभी जिंदगी में हार नहीं माना आज मैं जिस मुकाम पर  हु उसका श्रेय उसकी मां को जाता है यह कहकर डॉक्टर अविनाश वर्मा अपनी मां को स्टेज पर आने का कहते हैं प्रधानाध्यापक और अन्य बच्चे ताली बजाते हुए उनकाअभिवादन  किए।प्रधानाध्यापक ने कहा आपका बेटा बहुत होशियार और समझदार हैं गांव के लोगों का प्रेरणादायक है हमें सीख लेनी चाहिए अपराधी का बेटा अपराधी नहीं होता वह तो गांव के दुश्मनों ने झूठा केस में फंसा कर उन्हें जेल में डालवा दिया था और बड़े हर्ष के साथ बताने जा रहा हूं मुखिया जी और उनके बेटे कुछ ही महीनों बाद जेल से रिहा हो जाएंगे।. ‌‌. 


                         सपना कुमारी 
                            बिहार पटना